"खत्री धरोहर भवन"

अमर शहीद लाला जगत नारायण रमेश चंद बारात घर

खत्री धरोहर भवन, पुनहाना हमारे समाज की विरासत, परंपरा और पुरुषार्थ का जीवंत प्रतीक है। यह भवन केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि खत्री समाज की सांस्कृतिक पहचान, शिक्षा, सेवा और संगठन का केंद्र है। यहाँ पुस्तकालय, सभागार, सांस्कृतिक मंच और प्रेरणा दीवारें हमारी गौरवमयी इतिहास की गवाही देती हैं। खत्री धरोहर भवन का उद्देश्य युवाओं में एकता, जागरूकता और आत्मगौरव का भाव जगाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपने पूर्वजों की महान गाथाओं से प्रेरित होकर समाज के स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करें।

📍 स्थान: पुन्हाना, मेवात (हरियाणा)

सेवा, सिमरन और सरबत दा भला का केंद्र

गुरुद्वारा पुनहाना

गुरुद्वारा साहिब पुनहाना समाज सेवा का जीवंत प्रतीक है, जहाँ नित्य कीर्तन, लंगर और मानवता की सेवा निरंतर जारी है। यहाँ स्थापित “नानक प्याऊ आर.ओ. जल सेवा” के माध्यम से श्रद्धालुओं व ज़रूरतमंद परिवारों को मात्र ₹3 में शुद्ध आर.ओ. जल उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रतिदिन सैकड़ों परिवार इस सेवा से लाभान्वित हो रहे हैं। यह प्रयास “सरबत दा भला” और गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं का सच्चा अनुसरण है — सेवा ही सच्चा धर्म।

खत्री समाज की विरासत

खत्रीनामा पुस्तक

खत्रीनामा – सफर सदियों का, संघर्ष अपनों का ” एक दस्तावेज़ है
जो खत्री समाज के इतिहास, परंपराओं और संघर्षों को संजोता है।
यह पुस्तक नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास करती है।

खत्रीनामा – सफर सदियों का, संघर्ष अपनों का

प्रिय पाठक,

आपने अभी तक जिन अध्यायों में तथ्य, इतिहास और गौरव पढ़ा है – वह केवल कल्पना या सुनी-सुनाई बात नहीं है, बल्कि वर्षों की मेहनत और प्राचीन ग्रंथों से किए गए शोध का परिणाम है।हमने सीमित शब्दों में आपके सामने वह सार रखा है, जो खत्री समाज की असली पहचान और गौरव को उजागर करता है। यदि आप इस इतिहास को और गहराई से समझना चाहते हैं, तो इस “खत्रीनामा – सफर सदियों का, संघर्ष अपनों का” पुस्तक  को पूरा पढ़ें, ध्यानपूर्वक पढे ।इसमें उन सभी प्राचीन पुस्तकों, तवारीखों और प्रमाणिक ग्रंथों का उल्लेख है, जिनके आधार पर यह ग्रंथ तैयार हुआ है। साथ ही हमारी वेबसाइट पर इन प्राचीन ग्रंथों की पीडीएफ भी उपलब्ध हैं, जिन्हें पढ़कर आप स्वयं खत्री समज को लेकर ओर अधिक शोध कर सकते हैं।


यह पुस्तक केवल शब्दों का संग्रह नहीं
, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है – जो हमारे गौरवशाली अतीत से जुड़ने और उसे समझने की प्रेरणा देता है।  लेखक हरीश पंकज खरबन्दा ने इस अभियान की शुरुआत अपने अनुभवों और समाज के प्रति समर्पण के साथ की, ताकि खत्री समाज को फिर से एक संगठित, सशक्त और आत्मगौरव से भरा हुआ बनाया जा सके। देशभर में भ्रमण करते हुए उन्होंने खत्री समाज के इतिहास, धार्मिक आस्थाओं और सामाजिक योगदान को एकत्र किया – जिसमें मां हिंगलाज, मां भवानी और गुरु साहिबान की प्रेरणा प्रमुख रही। इस पहल का उद्देश्य न केवल समाज को उसकी जड़ों से जोड़ना है, बल्कि सामाजिक एकता, सहयोग और उत्थान की भावना को भी प्रबल करना है – ताकि हर खत्री गर्व से कह सके, “हम खत्री हैं।”


खत्री समाज – इतिहास से वर्तमान तक

इतिहास कोई समाप्त यात्रा नहीं, यह सतत साधना है - संभव है कि इस पुस्तक में कुछ त्रुटियाँ रह गई हों। परंतु हमारा संकल्प है कि आने वाले समय में आपके सुझाव, आपके अनुभव और आपकी नई जानकारी से यह यात्रा और सशक्त होगी। यह हमारी पहली पुस्तक जरूर है, लेकिन आख़िरी नहीं। आगे और भी पुस्तकें, डिजिटल कार्यक्रम और अभियान आपके सामने आएँगे, ताकि खत्री समाज का हर युवा अपने गौरवशाली इतिहास को जान सके और गर्व से कह सके: “मैं खत्री हूँ, मैं भारत की धरोहर हूँ!”

यह किताब केवल अक्षरों का भंडार नहीं है, यह हमारी रगों में बहता हुआ लहू है, हमारे पूर्वजों की हुंकार है, हमारी आत्मा की पुकार है। हमने जो कुछ लिखा है, वह प्राचीन ग्रंथों, अमर दस्तावेज़ों हमारे जन-जीवन से लिया है। यह केवल जानकारी नहीं – यह वह रोशनी है, जो हर खत्री परिवार तक जानी चाहिए । अब हमें सांस्कृतिक आंदोलन करने होंगे, डिजिटल मुहिम चलानी होगी। लेकिन इसके लिए हमें चाहिए – आपका हाथ, आपका जोश और आपका साथ। आप याद रखो कि  – जो युवा अपने इतिहास को भूलता है, वह भविष्य की लड़ाई हार जाता है। लेकिन जो अपनी जड़ों को पहचान लेता है, उसे कोई ताक़त झुका नहीं सकती।  आओ, मिलकर एक दूसरे से यह वायदा करे कि हमें अपने समाज को बाँटना नहीं, जोड़ना है। हमें अपने गौरव को छुपाना नहीं, पुकारना है। अपनी पहचान को दबाना नहीं, बल्कि दुनिया के सामने ललकारना है।

आपके हाथ में खत्रीनामा सिर्फ़ एक किताब नहीं – यह आंदोलन है। यह शंखनाद है, यह बिगुल है, यह हुंकार है। और इसका असली अध्याय अब आपकी कलम और आपके कर्म से लिखा जाएगा। आओ खत्रीनामा को अपना अस्त्र बनाकर इस समाज को फिर से एकजुट करो। क्योंकि – “हम खत्री हैं – तलवार हमारी, कलम हमारी, और पहचान हमारी!”

 “खत्रीनामा – सफ़र सदियों का, संघर्ष अपनों का।”

खत्रीनामा = सफर सदियों का, संघर्ष अपनों का.......

खत्री समाज की गौरवगाथा, अतीत से वर्तमान तक

“खत्रीनामा” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि खत्री समाज के गौरव, संघर्ष और परंपराओं की जीवंत अभिव्यक्ति है। यह एक महायात्रा है – अपनी जड़ों की तलाश की, अपने इतिहास को पहचानने और उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की।

✦ ✦ समाज का ऐतिहासिक और वर्तमान योगदान

खत्री समाज ने इतिहास में गौरवशाली योगदान दिया है – शिक्षा, व्यापार, प्रशासन, सेवा, और धर्म के क्षेत्र में अद्वितीय भूमिका निभाई है। आज भी यह समाज सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से एक मजबूत स्तंभ बना हुआ है। लेकिन समय के साथ इसके योगदान को वह सम्मान नहीं मिला जिसका वह सच्चा हकदार था।

✦ ✦ एक संकल्प – अपनी जड़ों की ओर लौटने का

इन्हीं विचारों को केंद्र में रखते हुए हरीश पंकज खरबन्दा ने शुरू किया एक विशिष्ट सफर – "खत्रीनामा – सफर सदियों का, संघर्ष अपनों का"। यह सिर्फ लेखन नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है – बुजुर्गों के अनुभवों, स्वर्णिम अतीत और समाज की सामूहिक स्मृति को जोड़ने का प्रयास।

✦ ✦ हरियाणा से देशभर तक का समाजिक अभियान

हरीश पंकज खरबन्दा ने युवावस्था से ही खत्री समाज को संगठित करने की दिशा में कार्य आरंभ किया। आज वे हरियाणा से लेकर देशभर के विभिन्न राज्यों तक इस मिशन को लेकर सक्रिय हैं, और उनके साथ जुड़ी है एक समर्पित टीम जो इस उद्देश्य को और आगे बढ़ा रही है।

✦ ✦ धार्मिक चेतना और परंपरा का संगम

यह यात्रा केवल सामाजिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक भी है। मां हिंगलाज, मां भवानी और गुरू साहेबान का स्मरण करते हुए यह मिशन परंपरा और चेतना का संगम बन चुका है।

✦ ✦ "खत्रीनामा" – सिर्फ पुस्तक नहीं, पहचान की पुकार

यह दस्तावेज़ हमारे अस्तित्व की जड़ों से जुड़ने, हमारे पूर्वजों की विरासत को जानने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए गर्व से साझा करने का माध्यम है।

✦ ✦ हमारी संस्कृति – हमारी असली शक्ति

खत्री समाज की भाषा, वेशभूषा, उत्सव, धार्मिक आस्थाएं और पारिवारिक परंपराएं – यह सब हमें एक विशिष्ट पहचान देते हैं। "खत्रीनामा" इन्हीं पहलुओं को सहेजते हुए एक सांस्कृतिक विरासत का निर्माण कर रहा है।

✦ ✦ भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर

युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और इतिहास से जोड़ना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। "खत्रीनामा" उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम है।

✦ ✦ नारीशक्ति – खत्री समाज की रीढ़

खत्री स्त्रियों ने हर युग में समाज और परिवार के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाई है। उनकी प्रेरणादायक कहानियां "खत्रीनामा" का अहम हिस्सा हैं।

✦ ✦ गौरवशाली व्यक्तित्व – जिनसे रोशन हुआ समाज

"खत्रीनामा" में उन महान व्यक्तित्वों का उल्लेख होगा जिन्होंने खत्री समाज को दिशा और सम्मान दिया – स्वतंत्रता सेनानी, समाजसेवी, शिक्षक, व्यापारी और प्रशासक।

✦ ✦ डिजिटल युग में खत्री समाज का संगठन

अब समय है खत्री समाज को तकनीक के साथ जोड़ने का – वेबसाइट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन मीटिंग्स और डिजिटल आर्काइव के ज़रिए हम हर खत्री तक पहुंच बना रहे हैं।

✦ ✦ "खत्रीनामा" को बनाएं अपनी आवाज

आपके अनुभव, संस्मरण, परिवार की कहानियाँ – सब "खत्रीनामा" का हिस्सा बन सकती हैं। आइए, इस महायज्ञ में सहभागी बनें और खत्री समाज को एक सशक्त, संगठित और गौरवशाली दिशा दें।

गर्व करें कि हमारे बुजुर्ग महान थे,
गर्व करें कि हमारी नई पीढ़ी दुनिया में कीर्तिमान स्थापित कर रही है।
गर्व से कहो – हम खत्री हैं!

कृपया अपना हाथ बढ़ाएं

यह सिर्फ एक किताब नहीं, एक ज़िंदा दस्तावेज़ है,
जो सदियों पुराने खत्री समाज की मिट्टी, मेहनत और मान को शब्दों में बुनता है।
परंपराओं की गूंज, संघर्षों की छाया और पहचान की चमक – सब कुछ समेटे हुए। की मिसाल कायम की है।

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✦ खत्रीनामा – सफर सदियों का, संघर्ष अपनों का ✦

✦ खत्री समाज के गौरव और परंपरा की कहानी ✦

✦ अपनी जड़ों की ओर लौटने का एक संकल्प ✦

✦ सामाजिक एकता और सशक्तिकरण की ओर कदम ✦

✦ गर्व से कहो – हम खत्री हैं! ✦

✦ खत्री समाज का विकास और सामाजिक जिम्मेदारी ✦

✦ खत्री समुदाय की समृद्धि और शक्ति का प्रतीक ✦

✦ खत्री समाज में समानता और भाईचारे का संदेश ✦

✦ हर खत्री का योगदान महत्वपूर्ण है ✦

✦ समाज की उन्नति के लिए एकजुटता है जरूरी ✦

खत्रीनामा – सफर सदियों का, संघर्ष अपनों का

“खत्रीनामा – सफर सदियों का, संघर्ष अपनों का” एक ऐसी जीवंत अभिव्यक्ति है, जो खत्री समाज के इतिहास, परंपराओं और संघर्षों को संजोने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास करती है।

यह पुस्तक केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है – जो हमारे गौरवशाली अतीत से जुड़ने और उसे समझने की प्रेरणा देता है।

लेखक हरीश पंकज खरबन्दा ने इस अभियान की शुरुआत अपने अनुभवों और समाज के प्रति समर्पण के साथ की, ताकि खत्री समाज को फिर से एक संगठित, सशक्त और आत्मगौरव से भरा हुआ बनाया जा सके।

देशभर में भ्रमण करते हुए उन्होंने खत्री समाज के इतिहास, धार्मिक आस्थाओं और सामाजिक योगदान को एकत्र किया – जिसमें मां हिंगलाज, मां भवानी और गुरु साहिबान की प्रेरणा प्रमुख रही।

इस पहल का उद्देश्य न केवल समाज को उसकी जड़ों से जोड़ना है, बल्कि सामाजिक एकता, सहयोग और उत्थान की भावना को भी प्रबल करना है – ताकि हर खत्री गर्व से कह सके, “हम खत्री हैं।”

खत्रीनामा : हमारे प्रयास, सकारात्मक बदलाव

हमारा अगला अभियान आपकी भागीदारी से ही सफल हो सकता है। इस बार हमारा लक्ष्य शिक्षा, स्वास्थ्य, और पर्यावरण की दिशा में बड़े स्तर पर बदलाव लाना है। आइए, हमारा हाथ थामें और समाज की भलाई में योगदान दें।..

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माता हिंगलाज जी कि आरती-khatrinaama
माता हिंगलाज की आराधना से न केवल हमें आशीर्वाद मिलता है, बल्कि हमारे घर और व्यापार में समृद्धि और सुख-शांति आती है। यह समय है कि हम अपने पुरखों की परंपराओं को पुनः अपनाएं और उनकी कृपा प्राप्त करें। आइए, माता हिंगलाज की इस अद्भुत आरती का गुणगान करें और इसे अपने घरों तथा व्यापार स्थल पर नियमित रूप से गाएं। इस आरती को फेसबुक और यूट्यूब पर जरूर पोस्ट करें ताकि इसका लाभ सभी को मिले। पुस्तक: 'खत्रीनामा - सफर सदियों का, संघर्ष अपनों का' संपादक: हरीश पंकज खरबन्दा
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✦ समाज में योगदान की कहानी
समाज में खत्री परिवारों के योगदान को समझने के लिए इस वीडियो को देखें।
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खत्री समाज के बुज़ुर्गो ने अपने गौरव को बचाने और पहचान को ज़िंदा रखने के लिए सदियों तक संघर्ष किया
"खत्री समाज के बुज़ुर्गों ने अपने गौरव को बचाने और पहचान को ज़िंदा रखने के लिए सदियों तक संघर्ष किया है। आज हमारी बारी है कि हम उस संघर्ष को पहचानें, उसका सम्मान करें – और जातिगत जनगणना में एकजुट होकर अपने आपको 'खत्री' के रूप में दर्ज करवाएं। यह सिर्फ एक शब्द नहीं, यह हमारी पहचान, हमारी विरासत और हमारे इतिहास का सम्मान है। इस वीडियो को पूरा देखें, और आगे भी शेयर करें — ताकि हर खत्री को पता चले कि इस बार की जनगणना में हमारी ज़िम्मेदारी क्या है। हमारे बुज़ुर्गों ने संघर्ष किया था, अब हमारी बारी है गर्व से कहने की: हम खत्री हैं। हरीश पंकज खरबंदा संपादक, खत्रीनामा – सफर सदियों का, संघर्ष अपनों का
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जातिगत जनगणना केवल आंकड़े नहीं, यह हमारे गौरव, अधिकार और पहचान का प्रतीक है।
जय माता हिंगलाज! जय माँ भवानी! यह वीडियो हर उस खत्री भाई-बहन के लिए है, जो अपनी पहचान को जानना और आने वाली पीढ़ियों तक गर्व से पहुँचाना चाहता है। इस वीडियो में हम बात करेंगे: जातिगत जनगणना का महत्व खत्री समाज का गौरवशाली इतिहास जनगणना में "खत्री" के रूप में खुद को दर्ज करवाने की प्रक्रिया इससे मिलने वाले सामाजिक और राजनीतिक फायदे और आप कैसे इस मुहिम में योगदान दे सकते हैं यह सिर्फ आँकड़ों की लड़ाई नहीं है, यह हमारी पहचान की लड़ाई है!
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✦ खत्री समाज के इतिहास को जान
खत्री समाज का इतिहास सदियों पुराना और गौरवमयी है। इस वीडियो में हम खत्री समाज के योगदान और गौरव को जा
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खत्री समाज के गौरव को जानें
हमारे खत्री समाज के अद्वितीय योगदान को जानने के लिए इस वीडियो को देखे
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हमारी गैलरी हर तस्वीर, एक कहानी

हमारी गैलरी में हमारे बदलाव की झलकियाँ छिपी हैं, जहाँ हर तस्वीर एक नई उम्मीद और आपकी साझेदारी का प्रतीक है। आइए, हमारे साथ इन प्रेरणादायक पलों का हस्सा बनें।ा प्रतीक है...

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संघर्ष, सेवा और सम्मान – यही है हमारी पहचान।

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परंपरा, संघर्ष और विश्वास की विरासत से जन्मा खत्रीनामा। यहाँ व्यापार सिर्फ सौदा नहीं, बल्कि रिश्तों का सम्मान है। हम आपके व्यवसाय को देते हैं असली उत्पाद, सुरक्षित सेवा और भरोसे की गारंटी।

सफ़र सदीयों का, भरोसा अपनों का

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