✦ हमारे बुजुर्ग

हमारे बुजुर्ग - हमारी पहचान

कर्मशील व्यक्ति - जिन्होंने पुरुषार्थी पुन्हाना कोआपरेटिव सोसाइटी की नीव रखी|

श्री हिम्मत खरबंदा जी
श्री हिम्मत खरबंदा जी
श्री नन्दलाल कुमार जी
श्री नन्दलाल कुमार जी
श्री पुजारी जी
श्री पुजारी जी
श्री शांति कुमार मेम्बर जी
श्री शांति कुमार मेम्बर जी
श्री राधेश्याम मेम्बर जी
श्री राधेश्याम मेम्बर जी
श्री गोवर्धन दास छाबड़ा जी
श्री गोवर्धन दास छाबड़ा जी
श्री ऋषिराम छाबड़ा जी
श्री ऋषिराम छाबड़ा जी
श्री दौलतराम मेहता जी
श्री दौलतराम मेहता जी
श्री मोहनलाल वर्मा जी
श्री मोहनलाल वर्मा जी
श्री झांगीराम मास्टर जी
श्री झांगीराम मास्टर जी
श्री लक्ष्मण मास्टर जी
श्री लक्ष्मण मास्टर जी
श्री वीरभान जी
श्री वीरभान जी
श्री राम सिंह सरदार जी
श्री राम सिंह सरदार जी
श्री बसंत पाहुजा जी
श्री बसंत पाहुजा जी
श्री घनश्याम दास चेयरमैन जी
श्री घनश्याम दास चेयरमैन जी

पंजाबी पुरुषार्थी सभा और पुरुषार्थ कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसायटी : संघर्ष से सफलता तक का गौरवशाली सफर...

संघर्ष और संकल्प की नींव (1947–1957)

1947 में भारत की आज़ादी और विभाजन के बाद जब हमारे पूर्वज हरियाणा के मेवात जिले के पुन्हाना गाँव पहुँचे, तब हालात बेहद कठिन थे। जीवन-यापन के लिए उन्होंने बेलदारी की, कपड़ों के गट्ठर उठाकर गलियों में फेरी लगाई, लेकिन हार नहीं मानी। यह दौर उनके साहस और पुरुषार्थ का प्रतीक था। दस वर्षों के भीतर (1957 में) उन्होंने आपस में धन इकट्ठा कर लगभग 8.5 एकड़ भूमि खरीदी और एक सुव्यवस्थित पंजाबी कॉलोनी बसाई। यह कॉलोनी उस समय की आधुनिकतम सुविधाओं से परिपूर्ण थी और आज भी पूरे मेवात में अपनी तरह की सबसे विकसित कॉलोनी मानी जाती है। इस दूरदर्शिता का परिणाम यह है कि आज (2024 में) यहाँ की ज़मीन की कीमत महानगर गुरुग्राम के बराबर है।

1947 में भारत की आज़ादी और विभाजन के बाद जब हमारे पूर्वज हरियाणा के मेवात जिले के पुन्हाना गाँव पहुँचेतब हालात बेहद कठिन थे। जीवन-यापन के लिए उन्होंने बेलदारी कीकपड़ों के गट्ठर उठाकर गलियों में फेरी लगाईलेकिन हार नहीं मानी। यह दौर उनके साहस और पुरुषार्थ का प्रतीक था।

दस वर्षों के भीतर (1957 में) उन्होंने आपस में धन इकट्ठा कर लगभग 8.5 एकड़ भूमि खरीदी और एक सुव्यवस्थित पंजाबी कॉलोनी बसाई। यह कॉलोनी उस समय की आधुनिकतम सुविधाओं से परिपूर्ण थी और आज भी पूरे मेवात में अपनी तरह की सबसे विकसित कॉलोनी मानी जाती है। इस दूरदर्शिता का परिणाम यह है कि आज (2024 में) यहाँ की ज़मीन की कीमत महानगर गुरुग्राम के बराबर है।

दस वर्षों के भीतर (1957 में) उन्होंने आपस में धन इकट्ठा कर लगभग 8.5 एकड़ भूमि खरीदी और एक सुव्यवस्थित पंजाबी कॉलोनी बसाई। यह कॉलोनी उस समय की आधुनिकतम सुविधाओं से परिपूर्ण थी और आज भी पूरे मेवात में अपनी तरह की सबसे विकसित कॉलोनी मानी जाती है। इस दूरदर्शिता का परिणाम यह है कि आज (2024 में) यहाँ की ज़मीन की कीमत महानगर गुरुग्राम के बराबर है।

✦ ✦ पुरुषार्थी पुन्हाना कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसायटी (1957)

1957 में रजिस्टर्ड पुरुषार्थी पुन्हाना कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसायटी ने समाज को एकजुट किया। चौड़ी सड़कों, व्यवसायिक भवनों और आवासीय सुविधाओं ने पुन्हाना को नई पहचान दी। इस सोसायटी के प्रथम प्रधान घनश्याम दास जी रहे। उनके साथ लाला भगवान दास मेहता जी, गोवर्धन दास छाबड़ा जी, दौलत राम मेहता जी, गणेश दास जी, लालचंद जी, पुजारी लाल जी, भोपाल राम जी, नंदलाल कुमार जी, हिम्मत राम खरबंदा जी, राम सिंह कुमार जी, ऋषि छाबड़ा जी , भगवान दास पाहूजा जी, प्रेमचंद सिधानी जी, लेखराज चावला जी, आत्मप्रकाश सचदेवा जी, वीरभान जी, झांगी राम जी, उधो दास जी, गोपाल दास जी, मोहनलाल खरबंदा जी, मास्टर लक्ष्मण दास जी, शांति कुमार ठेकेदार जी आदि महान विभूतियों ने अथक परिश्रम कर इस संस्था को ऊँचाई दी। यही वह पीढ़ी थी जिसने न केवल कॉलोनी को बनाया बल्कि सामाजिक और राजनीतिक पहचान भी बनाई। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में खत्री समाज से दो बार सरपंच चुने गए – लाला भगवान दास मेहता और उनकी पुत्री चंद्रकला खरबंदा। साथ ही घनश्याम दास कुमार नगरपालिका चेयरमैन बने और समाज का नाम रोशन किया।

✦ ✦ पंजाबी पुरुषार्थी सभा (2001)

करीब 50 साल बाद अगली पीढ़ी ने यह महसूस किया कि समाज के उत्थान के लिए संगठन और कोष आवश्यक है। इसी सोच से 2001 में पंजाबी पुरुषार्थी सभा की स्थापना हुई। सभा का उद्देश्य सिर्फ पुन्हाना ही नहीं, बल्कि हरियाणा और पूरे देश में खत्री समाज की अलग पहचान बनाना था। 2007 से इसकी शाखाएँ देशभर में स्थापित की गईं और लगभग 15 वर्षों की मेहनत के बाद यह संस्था आज मजबूत स्तंभ बन चुकी है। आज गर्व से कहा जा सकता है कि सभा के पास करीब 50 करोड़ रुपए की संपत्ति है और यह पूरी तरह अपने बलबूते पर खड़ी है – बिना किसी चंदे के।

✦ ✦ वर्तमान नेतृत्व और योगदान

आज संस्था के संचालन में बसंत पाहुजा, आत्म प्रकाश कुमार, हरीश पंकज खरबंदा, हेमन्द्र चावला, अशोक मेहता, बालकिशन कुमार, अशोक मास्टर, दिनेश आहूजा, संजय कुमार पार्षद, नीरज छाबड़ा, महेश कुमार सिन्धानी, बालकिशन मल्होत्रा, इशान टुटेजा, पवन कुमार सहित कई सदस्य जी-जान से जुड़े हुए हैं। संस्था आज मार्केट, मंदिर, गुरुद्वारा, बारातघर और सामुदायिक गतिविधियों का संचालन दक्षता से कर रही है।

✦ ✦ निष्कर्ष – पुरुषार्थ की विरासत

यह गाथा सिर्फ जमीन खरीदने या इमारतें बनाने की नहीं है, बल्कि यह कहानी है संघर्ष से संकल्प और संकल्प से सफलता तक की। 1957 में जिस मशाल को हमारे बुजुर्गों ने जलाया, 2001 में उसे संगठन का स्वरूप मिला और आज यह मशाल समाज की एकता, प्रगति और गौरव का प्रतीक बन चुकी है। “पुरुषार्थी” नाम ही इस बात का प्रतीक है कि हमारे पूर्वजों ने कठिनाइयों से लड़कर भविष्य को संवारने का सपना देखा और आज हम उसी नींव पर खड़े होकर और आगे बढ़ने का संकल्प लेते हैं।
गर्व करें कि हमारे बुजुर्ग महान थे,
गर्व करें कि हमारी नई पीढ़ी दुनिया में कीर्तिमान स्थापित कर रही है।
गर्व से कहो – हम खत्री हैं!
हमारे बारे में

History of Khatris in India

Unveil the captivating history of Khatris, tracing their origins, cultural evolution, and enduring legacy in this enlightening book.
📖 खत्रीनामा
Main
खत्रीनामा
✦ हमारी विरासत, हमारी पहचान ✦

हम कौन हैं,
हम क्या करते हैं

खत्री समाज की ऐतिहासिक यात्रा — शिक्षा, संस्कृति और सेवा के पथ पर

हम कौन हैं

खत्री समाज की ऐतिहासिक परंपराएं, सामाजिक मूल्यों और एकता को संजोने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। हमारी कहानी सदियों पुराने संघर्ष, योगदान और समाजसेवा की है।

हम क्या करते हैं

हम खत्री समाज के सशक्तिकरण के लिए शिक्षा, संस्कृति, और सामाजिक सेवा के माध्यम से कार्य करते हैं। एकजुट होकर नई पीढ़ी को दिशा देते हैं।