“गौरवशाली इतिहास, स्वाभिमानी भविष्य”
स्थापना दिवस: 9 फरवरी 2025
अखिल भारतीय पंजाबी खत्री स्वयं सेवक संघ एक ऐसा संगठन है, जिसने अपनी स्थापना के बाद बहुत ही कम समय में भारतवर्ष के कोने-कोने में अपनी पहचान बना ली है।
9 फरवरी 2025 को स्थापित यह संगठन आज खत्री समाज के जागरण का प्रतीक बन चुका है।
जो कार्य आज तक किसी संस्था ने नहीं कर पाया, वह यह संगठन निरंतर कर रहा है।
देशभर में इसकी टीमें सक्रिय हैं — ऐसे हज़ारों युवा, जिन्हें पहले अपनी जाति, अपनी कुलदेवी या अपने गौरवशाली इतिहास की जानकारी नहीं थी,
आज गर्व से स्वयं को खत्री कहने लगे हैं।
इस संगठन ने खत्री इतिहास को जन-जन तक पहुँचाने और समाज को एक सूत्र में बाँधने का कार्य किया है।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री शेरू विग जी के नेतृत्व में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और जम्मू में कई सफल मीटिंग्स और कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
इन कार्यक्रमों का उद्देश्य है — खत्री समाज से जुड़े अधूरे कार्यों को पूरा करना और समाज की आवाज़ को सरकार तक पहुँचाना।
हाल ही में संघ द्वारा एक गीत प्रस्तुत किया गया है, जिसमें खत्रियों के गौरवशाली इतिहास के दर्शन होते हैं।
यह गीत न केवल संगीत के माध्यम से समाज को जोड़ता है, बल्कि युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का संदेश भी देता है
हमारा उद्देश्य
खत्री धर्मशालाओं की स्थापना:
हरियाणा और दिल्ली की सभी पंजाबी धर्मशालाओं को “खत्री धर्मशाला” के रूप में विकसित करना।
खत्री कुलदेवियों के भव्य मंदिर:
हिंगलाज माता, चंडिका माता और शिवाय माता के मंदिरों का निर्माण कर उनकी महिमा को पुनः स्थापित करना।
पीढ़ियों को इतिहास से जोड़ना:
आने वाली पीढ़ियों को खत्रियों के स्वर्णिम इतिहास से अवगत कराना और उनमें गर्व की भावना जागृत करना।
एक ऐतिहासिक केंद्र का निर्माण:
ऐसा केंद्र बनाना जहाँ 1947 के बुज़ुर्गों की यादें संजोई जाएँ,
खत्रियों का समृद्ध इतिहास प्रदर्शित हो,
और यह बच्चों व युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बने।
महान खत्री महापुरुषों का सम्मान:
सरदार हरि सिंह नलवा, मदन लाल ढींगरा, सुखदेव थापर, कैप्टन विक्रम बत्रा जैसे अमर वीरों की मूर्तियाँ स्थापित की जाएँ —
ताकि उनकी गाथाएँ सदा जीवित रहें।
“संपर्क मंच” – विवाह संबंधी पहल:
समाज के अविवाहित युवक-युवतियों के लिए एक ऑनलाइन व ऑफलाइन प्लेटफ़ॉर्म बनाया जाएगा,
जहाँ पारिवारिक पृष्ठभूमि, शिक्षा, संस्कार और विचारधारा को महत्व देते हुए
विवाह सम्बंधी जानकारी सुरक्षित व गोपनीय रूप से साझा की जा सके।
ऐतिहासिक व सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करना:
“खत्री इतिहास सप्ताह” मनाया जाएगा, जिसमें बच्चों और युवाओं को
खत्री वीरों, आर्य संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं के बारे में बताया जाएगा।
सोशल मीडिया, पुस्तकों और आयोजनों के माध्यम से
खत्रियों के इतिहास को जीवंत बनाए रखने का संकल्प लिया गया है।संघ का दृष्टिकोण
“जिस समाज को अपने इतिहास का ज्ञान नहीं होता, उसकी एकता को तोड़ना आसान होता है।”
इसी सोच के साथ शेरू विग भाई दिन-रात कार्य कर रहे हैं —
ताकि भारतवर्ष के हर कोने में खत्री समाज एकजुट होकर अपने गौरवशाली अतीत को पुनः पहचान सके।
📝 लेख का उद्देश्य
यह लेख भारतीय संस्कृति, इतिहास और ज्ञान पर आधारित जानकारी को सरल और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करता है।
📌 मुख्य बिंदु
- प्रामाणिक जानकारी
- सरल भाषा
- सांस्कृतिक दृष्टिकोण