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खत्री को-ऑपरेटिव (यू) बैंक लिमिटेड – समाज की आर्थिक शक्ति का स्तंभ
खत्री को-ऑपरेटिव (यू) बैंक लिमिटेड – समाज की आर्थिक शक्ति का स्तंभ
🗓 17 Mar 2026

किसी भी समाज की तरक्की में अर्थतंत्र की अहम भूमिका होती है। खत्री समाज ने भी इस आवश्यकता को समझते हुए अपनी आर्थिक प्रगति और सहयोग की भावना को सशक्त करने के लिए एक संस्थान की स्थापना की।

स्थापना और उद्देश्य

खत्री को-ऑपरेटिव (यू) बैंक लिमिटेड की नींव 30 अक्टूबर, 1939 को पंजाब सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1912 के तहत रखी गई (अब दिल्ली सहकारी सोसायटी अधिनियम 2003)।
इस बैंक को खत्री समुदाय से संबंधित व्यक्तियों ने "स्वयं सहायता, बचत और सहयोग" की भावना को प्रोत्साहित करने और समाज के सदस्यों के आर्थिक हितों की रक्षा के उद्देश्य से स्थापित किया।

प्रगति और मान्यता

वर्ष 1986 में बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक से लाइसेंस प्राप्त हुआ और इसके बाद बैंक ने तीव्र गति से विकास किया।

  • पहली शाखा: कृष्णा नगर, दिल्ली
  • दूसरी शाखा: सैनी एन्क्लेव, कड़कड़डूमा, दिल्ली
  • हमेशा‘ए’ श्रेणीका दर्जा प्राप्त
  • दिल्ली सरकार द्वारा तीन बार सर्वश्रेष्ठ सहकारी बैंकका पुरस्कार

संस्थापक प्रेरणा

लेफ्टिनेंट श्री श्याम किशोर खन्ना समाज की सेवा के लिए समर्पित व्यक्तित्व थे।

  • सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने 1960 के दशक में मात्र 900 रुपये सेखत्री ट्रस्ट की नींव रखी।
  • उनका सपना गरीब परिवारों की शादियों में आर्थिक मदद हेतु एक बैंक बनाना था।
  • यही ट्रस्ट आगे चलकर खत्री सहकारी शहरी बैंक लिमिटेडबना।
  • वे बैंक के पहले अध्यक्ष बने।
    आज उनके पुत्र राज खन्नालंदन के प्रतिष्ठित समाजसेवी हैं।

वर्तमान नेतृत्व

बैंक के वर्तमान चेयरमैन प्रेमराज मेहरा हैं, जो इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए समाज की आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लिए कार्यरत हैं।

खत्री को-ऑपरेटिव (यू) बैंक लिमिटेड केवल एक वित्तीय संस्था नहीं, बल्कि खत्री समाज की आत्मनिर्भरता, सहयोग और सामाजिक उत्थान का प्रतीक है। लेफ्टिनेंट श्याम किशोर खन्ना जैसे दूरदर्शी नेतृत्व और प्रेमराज मेहरा जैसे आधुनिक प्रबंधकों के प्रयास से यह बैंक आज समाज की आर्थिक शक्ति का स्तंभ बन चुका है।

📝 लेख का उद्देश्य

यह लेख भारतीय संस्कृति, इतिहास और ज्ञान पर आधारित जानकारी को सरल और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करता है।

📌 मुख्य बिंदु
  • प्रामाणिक जानकारी
  • सरल भाषा
  • सांस्कृतिक दृष्टिकोण