किसी भी समाज के विकास, उत्थान और कल्याण के लिए सबसे महत्वपूर्ण तत्व होते हैं: अपनी नस्लीय पहचान, संस्कृति एवं सभ्यता, पारिवारिक रीति-रिवाज, और इन सबका सामूहिक अनुकरण, जब कोई समुदाय संगठित होता है, तो वह समाज में एक विशिष्ट स्थान प्राप्त करता है। उसकी एकता उसे साहसिक, दृढ़ और निर्भीक बनाती है, जिसे कोई भी शक्ति सफलता प्राप्त करने से नहीं रोक सकती। इतिहास गवाह है कि संगठित समुदायों का सम्मान स्वयं राजसत्ता भी करती है।
एक संगठन की नींव: 2003 की स्मृतियां - वर्ष 2003 में हरियाणा प्रदेश में जब स्वर्गीय ओमप्रकाश चौटाला की सरकार थी, तब एक जाति विशेष का प्रभाव बढ़ रहा था। इस दौरान पंजाबी भाषी खत्री (क्षत्रिय) समाज बिखराव की स्थिति में था। समाज को एक मंच पर लाने की आवश्यकता महसूस हुई। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए कुछ ऊर्जावान युवकों ने समाज को एकीकृत करने का संकल्प लिया।
इन युवाओं में प्रमुख रूप से शामिल थे: पंकज खरबंदा (पुनहाना, मेवात), आनंद कांत भाटिया (फरीदाबाद), अनिल मनचंदा (गुड़गांव), नरेश मेंहदीरत्ता (तावडू), प्रेम चौधरी (हिसार) इन सबने मिलकर समाज की एकजुटता और पहचान को अक्षुण्ण रखने के लिए एक यात्रा शुरू की।
संघर्ष और प्रयास - समाज को संगठित करने के इस अभियान के दौरान हम सभी ने हरियाणा के सभी जिलों में भ्रमण किया। लगभग 35,000 से 40,000 किलोमीटर की यात्रा कर हमने समाज के प्रत्येक कोने तक पहुंचने का प्रयास किया। इस दौरान हमें समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े नए साथियों का सहयोग प्राप्त हुआ। उन्होंने अपने अनुभव साझा किए और समाज की अनकही समस्याओं से अवगत कराया। इन प्रयासों का परिणाम यह हुआ कि कैथल शहर में राष्ट्रीय पंजाबी परिषद के तत्वावधान में एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया। इस सभा में हरियाणा के कोने-कोने से समाज के लोग पहुंचे। मीडिया ने भी इस आयोजन को व्यापक कवरेज दिया।
सफलता पर आई चुनौतियांहालांकि, लोग सच कहते हैं कि सफलता और सुंदरता को जल्दी नजर लगती है। कुछ स्वार्थी तत्वों ने अपने व्यक्तिगत एजेंडे के तहत समाज की इस एकता को नुकसान पहुंचाने का कार्य किया। उन्होंने सामूहिकता को तोड़ने का प्रयास किया और अफवाहों का सहारा लेकर समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न की। इन परिस्थितियों के कारण संगठन की गति थोड़ी धीमी पड़ी, लेकिन आज भी हमारे साथी संपर्क में हैं। उत्साह, ऊर्जा और दृढ़ निश्चय बरकरार है।
भविष्य की राह - वर्तमान में स्थिति ऐसी है कि समाज नेतृत्वविहीन और निष्क्रियता का शिकार है। लेकिन, हमारे अंदर अभी भी वही जज्बा और हौसला कायम है। हमारा इरादा फिर से उठने और नई हुंकार भरने का है।
हम संकल्प लेते हैं कि पंजाबी भाषी खत्री (क्षत्रिय) समाज की दृढ़ता एवं सफलता के लिए पुनः संगठित होकर कार्य करेंगे।
प्रेम चौधरी, एडवोकेट हिसार।
📝 लेख का उद्देश्य
यह लेख भारतीय संस्कृति, इतिहास और ज्ञान पर आधारित जानकारी को सरल और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करता है।
📌 मुख्य बिंदु
- प्रामाणिक जानकारी
- सरल भाषा
- सांस्कृतिक दृष्टिकोण